Ganga Chalisa
Friday, September 25, 2026
गंगा चालीसा
(माँ गंगा जी की स्तुति)
दोहा
श्री गंगा चरण कमल, धरहु ध्यान मन माहिं।
सकल तीरथ रूप तव, हरहु भव बंध ताहि।।
चौपाई
जय गंगे माँ शिव सुखदानी,
जय त्रिपथगा पापनाशिनी ज्ञानी।
सकल सृष्टि तव महिमा गावे,
पावन धार जो जन नहावे।
स्वर्ग से धरती पर आई,
भागीरथ तपस्या सफलाई।
गंगा जल अमृत समान,
हर संताप, करे कल्याण।
शिव जटा में वास तुम्हारा,
रक्षक बन कर किया सहारा।
पतित पावनी नाम तुम्हारा,
त्रिभुवन में हो जय जयकारा।
तीर्थराज संगम की शोभा,
सुरसरि धारा बहत अमोघा।
काशी, प्रयाग, हरिद्वार पुनीता,
जहां सदा तव दर्शन प्रीता।
माँ गंगे तव चरण शरण,
हरहु संताप, मिटावहु भय।
तव जल जो नित्य पिवे नर,
जीवन में हो संतोषभर।
जो सुमिरन तव नाम करे,
उसके कष्ट सब दूर करें।
गंगा चालीसा जो नर गावे,
पुण्य अनन्त और मोक्ष पाए।
दोहा
श्री गंगा माँ कृपा करो, पतित तारिणी नाम।
भक्त तुम्हारे जो कहे, मिटे संकट काम।।