Tulsi Chalisa
Friday, September 25, 2026
तुलसी चालीसा
(भगवती तुलसी माता की स्तुति)
दोहा
श्री तुलसी सुमिर कर, चरण कमल में ध्यान।
दीनदयाल दया कर, पूर्ण करहु मनोभव ज्ञान।।
चौपाई
जय जय तुलसी माता मयारी,
सकल कामना पूरणकारी।
हरित भाल से तव रूप निराला,
शरणागत की हरती जंजाला।
लक्ष्मी रूप धर कर तव आई,
भक्तन को भवसागर से तराई।
तव गंध सुगंध जग महकावे,
तव नाम हरि नाम जपावे।
तुम सीता रूप धरत हरि संग,
तव गुण गावे सकल सुर मंगल।
विष्णु प्रिया कहलाती प्यारी,
तुम बिन पूजा अधूरी न्यारी।
संतजन तव गुण गान सुनावे,
भव बाधा से जग तर जावे।
तव की पूजा जो जन करिही,
सकल सिद्धि तेहि सहज मिलिही।
मुरलीधर के कंठ विभूषा,
हरन दुख सब करती तुष्टि।
तव उपासना जो नर करिही,
भवसागर से पार उतरिही।
तुम अमृत रूप तुलसी प्यारी,
हर जन मंगल कारज भारी।
जो जन तव नाम सुमिरन करिही,
सुख समृद्धि तिनहि घर धरिही।
दोहा
तुलसी चालीसा जो पढ़े, ध्यान धरहु जो ध्यान।
भवसागर से पार हो, पावे सुख का धाम।।